लखनऊ: समाजवादी पार्टी ने जिला कन्नौज को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। समाजवादी पार्टी ने कन्नौज की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी है। गौरतलब है कि कन्नौज से खुद अखिलेश यादव सांसद हैं, इसलिए कन्नौज में सपा की इस कार्रवाई की काफी चर्चा हो रही है।
क्यों लिया गया ये फैसला?
मिली जानकारी के मुताबिक, कन्नौज में PDA का सम्मेलन हुआ था, जिसमें पंडाल खाली दिखा था और लोगों की बहुत कम भीड़ दिखाई दी थी। माना जा रहा है कि इसी वजह से कन्नौज की पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया है।
विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने का प्रयास
यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कन्नौज में सपा ने पूरी कार्यकारिणी भंग करके यही संदेश दिया है कि कमजोर नेतृत्व की पार्टी में कोई जगह नहीं है और पार्टी में केवल उन लोगों को अहमियत दी जाएगी, जो जनाधार को बढ़ा सकें और जनता को पार्टी के एजेंडे के बारे में बता सकें।
कहा जा रहा है कि सपा हर लेवल पर इस बात की जांच कर रही है कि पार्टी का संगठन कहां कमजोर है। यही कारण है कि कन्नौज में ये कार्रवाई हुई और जिले में बदलाव की आहट होने लगी। कन्नौज में हुए पीडीए सम्मेलन में खाली पड़ी कुर्सियों ने इस बात को और भी पुख्ता कर दिया कि यहां पार्टी को बदलाव की जरूरत है। जो कुर्सियों अभी सम्मेलन में खाली हैं, वही आने वाले समय में सपा के वोट बैंक को भी कम कर सकती हैं।
दावेदारों को सता रही टिकट की चिंता
समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल कन्नौज में पीडीए सम्मेलन में पहुंचे थे। यहां मंच पर तो नेताओं की भारी भीड़ दिखाई दी थी लेकिन पंडाल में पड़ी कुर्सियां खाली थीं। जिसके बाद कन्नौज में कार्यकारिणी भंग की गई। अब कन्नौज में सपा से टिकट के दावेदारों को ये चिंता सता रही है कि उनके टिकट का क्या होगा।
अब सपा कन्नौज में नए तरीके से कार्यकारिणी बनाएगी, जिसमें ऐसे नेताओं को महत्व दिया जाएगा, जो जनता के बीच जाकर सपा को मजबूत कर सकें।
बता दें कि यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने एक बड़ा दांव खेला था, जिसके तहत ये खबर सामने आई थी कि लाल के साथ नीले रंग में भी नजर आएगी समाजवादी पार्टी।
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